जब तक मंजिल मिल ना जाती चैन नहीं आराम नहीं। जब तक मंजिल मिल ना जाती चैन नहीं आराम नहीं।
जो नजरों से गिर जाये उसे उठाना नहीं। जो नजरों से गिर जाये उसे उठाना नहीं।
कर्म होगा तेरा बस, कदम रख दुनिया इतिहास लिखेगी। कर्म होगा तेरा बस, कदम रख दुनिया इतिहास लिखेगी।
मैं खुद को खो बैठी हूँ, मैं नदी लुप्त हो रही हूँ। मैं खुद को खो बैठी हूँ, मैं नदी लुप्त हो रही हूँ।
हम भारतीय हैं साहब एक से मिले एक तो ग्यारह होते हैं। हम भारतीय हैं साहब एक से मिले एक तो ग्यारह होते हैं।